Yu Hi

किसी दिन ये धूप भी
छांव सी लगेगी
किसी दिन ये सुबह भी
शाम सी लगेगी

ज़िन्दगी की ये कश्मकश
चलती रहेगी
और यूँ ही ज़िन्दगी आशियानों
में जलती रहेगी

किसी दिन

किसी दिन ये सूरज भी रो कर कहेगा
बहोत कर लिया हमने उसका
अहतरां
किसी दिन तो सूरज के झड़ियां
लगेगीं

किसी दिन

किसी दिन घने धूप के दरम्यान
ही
छाएगा आँचल मेरे हौसलों का
आँखे दिखाऊंगा आतिश के मैं भी
सूरज भी देखेगा मेरी अदाएं
किसी दिन

By

Aditya srivastava

 

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